शिक्षा मनोविज्ञान अर्थ व परिभाषा ।। Shiksha manovigyan arth aur paribhasha ।। 

शिक्षा मनोविज्ञान अर्थ व परिभाषा ।। Shiksha manovigyan arth aur paribhasha ।।

दोस्तों www.hindiyug.com में आप सभी का स्वागत है आशा करते हैं कि आप सभी का पठन-पाठन अच्छे से चल रहा होगा। तो मित्रों आज के आर्टिकल के क्रम में हिन्दीयुग शिक्षा मनोविज्ञान के बारे में आप सबको बताएगा। यह बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है, इस टॉपिक से प्रायः (शिक्षकभर्ती, uptet, ctet, dsssb, kvs exam) आदि परीक्षाओं में एक से दो प्रश्न अवश्य ही पूछे जाते हैं।

शिक्षा मनोविज्ञान अर्थ व परिभाषा ।। Shiksha manovigyan arth aur paribhasha ।।

विषय – सूची : 👇

● शिक्षा मनोविज्ञान अर्थ व परिभाषा । Shiksha manovigyan arth aur paribhasha
● शिक्षा का वास्तविक अर्थ, shiksha ka vastvik aurth
● शिक्षा का आधुनिक अर्थ, shiksha ka adhunik aurth
● अनौपचारिक शिक्षा, anaupcharik shiksha
● औपचारिक शिक्षा aupcharik shiksha
● मनोविज्ञान की आधुनिक परिभाषाएं, adhunik paribhaashayen

शिक्षा मनोविज्ञान का परिचय :

शिक्षा मनोविज्ञान अर्थ व परिभाषा ।। Shiksha manovigyan arth aur paribhasha ।। शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की वह शाखा है। जिसमें यह अध्ययन किया जाता है कि- मनुष्य शैक्षिक वातावरण में कैसे सीखता है तथा हमारे शैक्षिक क्रियाकलापों को कैसे प्रभावी बनाया जाए इन्हीं सभी बातों को हम शिक्षा और मनोविज्ञान के अंतर्गत सीखते हैं।

“Educational theory and psychology have been and are advancing hand-in-hand”

According to Ross 

‘शिक्षा’ का शाब्दिक अर्थ :

शिक्षा शब्द की व्युत्पत्ति ‘शिक्ष‘ धातु सेे हुई है। जिसका अर्थ है , सीखना, विद्या प्राप्त करना या ज्ञान को ग्रहण करना। विद्या शब्द का प्रयोग भी शिक्षा के ही अर्थ में किया जाता है। अंग्रेजी भाषा में ‘शिक्षा‘ शब्द के लिए एजुकेशन शब्द का प्रयोग किया जाता है।

इस शब्द की व्युत्पत्ति  लैटिन भाषा के ‘एजुकेटम‘ शब्द से हुई है जिसका अर्थ है – शिक्षण कार्य करना। कुछ विद्वानों के अनुसार एजुकेशन शब्द की व्युत्पत्ति ‘एडुसियर‘ शब्द से हुई है।

1. शिक्षा का संकुचित अर्थ (औपचारिक शिक्षा) :

शिक्षा के संकुचित अर्थ से तात्पर्य विद्यालय /महाविद्यालय /विश्वविद्यालय में प्रदान की जाने वाली शिक्षा से है। इसमे शिक्षा देने वाला ( शिक्षक ) तथा शिक्षा प्राप्त करने वाला (बालक) व शिक्षण समग्री आदि सब निश्चित होता है। इसमे वयवहारिक व प्रयोगिक शिक्षा पर कम बल दिया जाता है।

ड्रेवर के अनुसार :-

“औपचारिक शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालको के ज्ञान ,चरित्र व व्यवहारों को एक निश्चित दिशा तथा रूप प्रदान किया जाता है”।

 मैकेन्जी के अनुसार :-

“संकुचित अर्थ में शिक्षा से तात्पर्य हमारी शक्तियों के विकास और सुधार के लिए चेतनापूर्व्क किये गये प्रयासों से है”।

2. शिक्षा का व्यापक अर्थ (अनौपचारिक शिक्षा) :

अनौपचारिक शिक्षा ऐसी शिक्षा है जो जीवनपर्यन्त चलने वाली शिक्षा है, अर्थात मानव अपने पूरे जीवनकाल में कुछ न कुछ सीखता रहता है। अनौपचारिक शिक्षा के अंतर्गत बालक गली मुहल्ले, विद्यालय ,समाज ,व पर्यावरण आदि के द्वारा कुछ न कुछ  सीखता रहता है। इसके द्वारा बालक का सर्वांगीण विकास सम्भव हो पाता है, और इसके अंतर्गत औपचारिक शिक्षा भी आ जाती है।

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मैकेन्जी के अनुसार :-

“अनौपचारिक शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है ,जो जीवनपर्यन्त चलती है और जीवन के प्रत्येक अनुभव उसके ज्ञान भंडार में वृद्धि करते है”।

3.शिक्षा का वास्तविक अर्थ :

शिक्षा के संकुचित अर्थ व्यापक अर्थ दोनों ही शिक्षा के वास्तविक अर्थ के क्रम में शिक्षा का संकुचित अर्थ परंपरागत एवं रूढ़िवादी बना देता है। जबकि शिक्षा का व्यापक अर्थ व्यक्ति को सामाजिक व व्यावहारिक उपयोगी बना देता है। जबकि शिक्षा का वास्तविक अर्थ इन दोनों के मिश्रण से ही बनता है।

शिक्षा का वास्तविक अर्थ- शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके परिणाम स्वरूप बालक की जन्मजात शक्तियों का विकास स्वाभाविक रूप से होता है परिणाम स्वरूप उसके व्यक्तित्व में पूर्णता आती है। वह सामाजिक, भौतिक व आध्यात्मिक पर्यावरण के साथ समायोजन कर सकता है।

4. शिक्षा का आधुनिक अर्थ :

शिक्षा का आधुनिक अर्थ : आधुनिक भारतीय समाज, विकासशील तथा उभरता हुआ भारतीय समाज बन चुका है। लोक शिक्षा वर्तमान भारतीय समाज की आवश्यकता एवं आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के उद्देश्य को निर्धारित करना चाहिए। हमें शिक्षण के समय यह ध्यान रखना चाहिए कि एक तरफ तो हमें बालकों की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए और दूसरी तरफ संपूर्ण विश्व ने प्रगति की दौड़ में आगे निकलने के लिए एक उच्च शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए।यही हमारे आधुनिक व प्रगतिशील समाज की आवश्यकता व आकांक्षा है।

शिक्षा मनोविज्ञान की आधुनिक परिभाषाएं :

फ्रेंड्सन के अनुसार :-

“आधुनिक शिक्षा का संबंध व्यक्ति और समाज, दोनों की कल्याण से है”।

डमविल के अनुसार :-

“अपने व्यापक अर्थ में  शिक्षा में वे सब प्रभाव सम्मिलित रहते हैं जो व्यक्ति पर उसके जन्म से लेकर मृत्यु तक पड़ते हैं”।

जॉन डयूवी के अनुसार :-

“शिक्षा व्यक्ति की उन सभी योग्यताओं का विकास है जिसके द्वारा वह अपने वातावरण पर नियंत्रण करने की क्षमता प्राप्त करता है तथा अपनी संभावनाओं को पूर्ण करता है”।

शिक्षा की भारतीय ग्रंथों के अनुसार परिभाषा :

●  उपनिषद -‘सा विद्या या विमुक्तए’।

●  विवेकानंद -‘मानव की अंतर नहीं तो शक्तियों की अभिव्यक्ति ही शिक्षा है’।

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