चाणक्य नीति की महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

Contents

चाणक्य नीति की  महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

मित्रों हमारे वेबसाइट www.hindiyug.com में आपका हार्दिक स्वागत है। आशा यही है कि आप सब लोगो काअध्ययन, लेखन, पठन पठान कार्य अच्छे से चल रहा होगा। मित्रों यदि आप अपने जीवन में सफल होना चाहते है तो आपके लिए यह आर्टिकल बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। क्योंकि आज के आर्टिकल में हम आपको चाणक्य नीति की महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।

विषय- सूची :✍️

चाणक्य नीति की  महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten ,
◆हमारा यह वर्तमान समय कैसा है?
◆आय-व्यय का व्यवरा ,
◆आपके निवास स्थान का परिवेश कैसा है?
◆हमारे अंदर की ऊर्जा/शक्ति ?
◆हमारे मुख्य मित्र/शत्रु कौन हैं?

चाणक्य नीति की महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

वर्तमान समय को देखते हुए ही चाणक्य ने अपने नीति में कुछ ऐसे सूत्र बताए है जिनसे हम सब को सीखना चाहिए। इस मौहाल में मेहनत, मजदूरी तो सभी करते है क्योंकि येन, केन, प्रकारेण, पेट तो सबको चलाना है।

किन्तु बहुत मेहनत करने के बाद भी कुछ व्यक्तियों को कुछ कामों में तो सफलता मिल जाती है, परन्तु कुछ कामों में वह असफल भी हो जाते है। यदि आप अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो चाणक्य नीति में बतायी गयी कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान पूर्वक पढ़िये।

चाणक्य एक महान कूटनीतिज्ञ था। जिसने अपने नीति में महिलाओं, पुरूषो तथा समाज से जुड़े सभी वर्गों, जाति, धर्म व तरह-तरह की बातों का जिक्र किया है, यदि हम उन बातों को अपने जीवन में अपना ले तो, किसी भी कार्य में एक दिन में तो नही परन्तु एक दिन सफलता जरूर प्राप्त कर लेँगे।

चाणक्य नीति की  महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

chankya niti ki mhatvapurna baten :

चाणक्य नीति के प्रमुख श्लोक और उनके अर्थ :

अन्नहीनो दहेद् राष्ट्रं मन्त्रहीनश्च ऋत्विज:।
यजमानं दानहीनो नास्ति यज्ञसमो रिपु:।।

इस श्लोक का अर्थ:

जिस देश या राज्य के लोग भुखमरी से मर रहे हो और वहां पर हवन आदि शुभ काम में घी तथा अन्न को जलाना राष्ट्रद्रोह/देशद्रोह के समान कार्य है। ऐसे में हवन का आयोजन करने वाले ब्राह्मण तथा आयोजक दोनों ही मंत्रों की शुद्धता और अनुष्ठान को कलंकित करते हैं। इस आयोजन के बदले उन्हें भूखों को खाना खिलाना चाहिए। न कि हवन आदि का आयोजन, करना चाहिए।

“एक एवं पदार्थस्तु त्रिधा भवति वीक्षित:।
कुणप: कामिनी मांसं योगिभि: कामिभि: श्वभि:।।”

इस श्लोक का अर्थ :

सभी लोगों के किसी भी वस्तु/व्यक्ति को देखने के अलग-अलग नजरिए होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे को स्वयं के नजरिए से ही देखना पसंद करता है।

उदाहरण से समझिए : एक खूबसूरत स्त्री एक सच्चे योगी, साधु, सज्जन, ज्ञानी के लिए मुर्दे के समान ही होती है, जिसका उसके जीवन में कोई उपयोग नहीं है। परन्तु वहीँ पर एक कामी पुरूष (♂♀) के लिए वह उसके इच्छापूर्ति का एक साधन है, कुत्ते/शेर/चीते अथवा हिंसक जीव के लिए वह न तो मुर्दा और न ही कामपूर्ती का साधन, बल्कि मांस के टुकड़ों के रूप में मात्र उसके भोजन का साधन है।

“नाऽत्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम्।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपा:।।”

इस श्लोक का अर्थ :

किसी भी व्यक्ति को कभी भी बिल्कुल सीधा और सरल नहीं होना चाहिए। क्योंकि जंगलो में जो पेड़ सीधे, और आसानी से मिलने वाले होते हैं अर्थात जिन्हें काटने में कोई कठिनाई नहीं होती, लोग सबसे पहले उन्हें ही काटते है।

“स्त्रीणां दि्वगुण आहारो बुदि्धस्तासां चतुर्गुणा।
साहसं षड्गुणं चैव कामोऽष्टगुण उच्यते।।”

इस श्लोक का अर्थ :

एक सामान्य महिला पुरूष की तुलना में दूना आहार लेती है, और लगभग पुरुषों से चार गुना बुदि्धमान और चालाक होती है, छह गुना साहसी भी होती है और उसमें (काम की प्रवत्ति ♂♀ ) भी पुरूष से लगभग 8 गुना अधिक होती है। यही कारण है कि स्त्री पुरूष को सदैव परास्त कर देती है।

यस्याऽर्थास्तस्य मित्राणि यस्याऽर्थास्तस्य बान्धवा:।
यस्याऽर्था: स पुमांल्लोके यस्याऽर्था: स च जीवति।।”

इस श्लोक का अर्थ :

सम्पूर्ण विश्व को चलाने का एकमात्र साधन धन-धान्य ही है। जिनके पास धन है, उसी के पास मित्र तथा सगे संबंधी होते हैं। उनके धनी होने के कारण ही उन्हें वास्तविक पुरूष या महिला माना जाता है। वह मूर्ख हो फिर भी धनी होने के कारण उन्हें बुद्धिमान, विद्वान तथा योग्य माना जाता है।

👉 यह भी पढ़िये :- रामसेतु निर्माण में गिलहरी का योगदान की अदभुत कहानी। click here

“शुन: पुच्छमिव व्यर्थ जीवितं विद्या विना।
न गुह्यगोपने शक्तं न च दंशनिवारणे।।”

इस श्लोक का अर्थ :

कुत्ते की पूंछ कभी भी उसके लिए गर्व का विषय नहीं हुआ करती, और न हीं यह उसके शरीर से मक्खी, मच्छर, कीट-पतंगउ ड़ाने के काम आया करती है। कम जानने वाले मनुष्य की बुद्धि (अधजल गगरी छलकत जाए) भी इसी तरह अनुपयोगी होती है। इसलिए उसे ज्यादा से ज्यादा सीख लेनी चाहिए।

“क्रोधो वैवस्वतो राजा तृष्णा वैतरणी नदी।
विद्या कामदुधा धेनु: सन्तोषो नन्दनं वनम्।।”

इस श्लोक का अर्थ :

क्रोध ही मृत्यु को न्योता देता है, लालच दु:ख को न्योता देती  है। विद्या एक ऐसी दूध देने वाली गाय के समान है होती है  जो प्रत्येक मानव की हर जगह रक्षा करती है तथा संतोषी स्वभाव का व्यक्ति कही भी आसानी से किसी भी परिस्थिति में अपना जीवन निर्वाहन कर सकता है।

“प्रातद्र्यूतप्रसंगेन मध्यान्हे स्त्रीप्रसंड्गत:।
रात्रौ चौर्यप्रसंगेन कालो गच्छत्यधीमताम्।।”

इस श्लोक का अर्थ :

बुद्धिमान पुरूषों को अपना मूल्यवान/कीमती समय को अध्ययन तथा मनन में ही बिताना चाहिए, न कि इधर उधर की बातों में, बल्कि उन्हें सुबह उठ कर जुआरियों की कहानी से तातपर्य महाभारत से है और चोरों और स्त्रियों की गतिविधियों के बारे में भी अध्ययन करना चाहिए।

उपरोक्त श्लोक में चाणक्य ने महाभारत तथा रामायण के उदाहरणों का उल्लेख किया है। जुआरियों की कहानी से तात्पर्य है कि युधिष्ठिर से है जिन्होंने जुए के खेल में अपने राज-पाट और अपनी पत्नी द्रौपदी को भी भरी सभा में निर्वस्त्र होने पर मजबूर कर दिया, और महाभारत के विशाल युद्ध की नींव रखी।

ठीक इसी प्रकार रानी कैकयी ने अपनी जिद के चलते राम के लिए वनवास मांग कर राजा दशरथ की मृत्यु और भरत की शत्रुता का अपराध किया था, वहीं शूर्पनखा ही अपने भाई और उनके वंश के नाश का कारण थी।

“अत्यासन्ना विनाशाय दूरस्था न फलप्रदा:।
सेवितव्यं मध्याभागेन राजा बहिर्गुरू: स्त्रियं:।।”

इस श्लोक का अर्थ :

किसी भी आदमी को राजा से (आलाधिकारियों) आग तथा स्त्रियों से न तो दूर रहना चाहिए और न ही इनके अधिक पास भी जाना चाहिए। राजा किसी भी देश का मुखिया होता है, उनके अधिक पास जाने पर अपमान, कैद या अन्य तरह का डर भी बना रहता है। इसी तरह आग से भी अधिक दूरी करने पर न तो खाना पकाया जा सकता है,

और न ही कोई अन्य लाभ उठाया जा सकता है। लेकिन आग के ज्यादा नजदीक जाते ही आग से हाथ भी जल जाता है। ठीक इसी प्रकार स्त्री के अधिक निकट जाने से उसकी ईर्ष्या का तथा अधिक दूर जाने पर उसकी घृणा का शिकार होना पड़ता है। इसीलिए हमे इन तीनों से सदैव कुछ उचित दूरी बनाकर ही रखनी चाहिए।

“अनवस्थितकार्यस्य न जने न वने सुखम।
जने दहति संसर्गो वने सड्गविवर्जनम्।।”

इस श्लोक का अर्थ :

एक अनुशासनहीन व्यक्ति सदैव खुद दुखी रहता है साथ ही दूसरों को भी दुखी करता रहता है। जब वह समाज में रहता है तो वह नियमों को तोड़ कर दूसरे लोगों तथा खुद के लिए कठिनाईयां पैदा कर लेता है।

जब उसी व्यक्ति को जंगल में अकेला छोड़ दिया जाता है तो वह वहां अपने मित्रों या सगे सम्बन्धियों के साथ नहीं होने की वजह से परेशान हो जाता है। बिल्कुल सरल भाषा में अनुशासन के बिना व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता, न ही साथ वालो को रहने देता है।


चाणक्य नीति की महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

हमारा यह वर्तमान समय कैसा है?

चाणक्य नीति के अनुसार सफल व्यक्ति वही होते है जिन्हें इस प्रश्न का उत्तर पता होता है, कि यह समय कैसा चल रहा है? बुद्धिमान व्यक्ति जानता है कि वर्तमान समय कैसा चल रहा है। हमेशा अपने समय का आकलन करते रहना चाहिए ।

हमारे अंदर की ऊर्जा/शक्ति ?

आचार्य चाणक्य के अनुसार सबसे जरुरी बात यही है कि हमें अपनी ताकत को आंकते रहना चाहिए। यदिहम सफलता प्राप्त करना चाहते है तो, हमें पता होना चाहिए कि हम क्या कर सकते हैं क्या नही उसी के अनुसार ही कार्यो को करना चाहिए।

हमारे मुख्य मित्र/शत्रु कौन हैं?

हमें यह भी पता होना चाहिए कि हमारे सच्चे/हितैषी मित्र कौन-कौन हैं और कौन-कौन बनावटी और अवसरवादी है। मित्रों के वेश में छिपे शत्रु का पहचाना बेहद जरूरी है।

आपके निवास स्थान का परिवेश कैसा है?

यह देश/स्थान/परिवेश कैसा है से तात्पर्य यह है कि हमजिस जगह पर काम कर रहे हैं वह जगह कैसी है, वहां परिवेश और वातावरण कैसा हैं। काम करने वाली जगह पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इन सभी बातों को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए।

आय-व्यय का व्यवरा :

सभी व्यक्तियों को अपनी आय और व्यय की जानकारी होनी चाहिए। हमे आय से अधिक व्यय नही करना चाहिए जो लोग आय से अधिक खर्च करते हैं, वे लोग सदैव परेशानियों में रहते हैं। धन संबंधी सुख पाने के लिए कभी भी गलत मार्ग से भी धनार्जन करना चाहिए।

दोस्तों मुझे आप लोगो से भी आशा ही नही वरन विस्वास है कि यह आर्टिकल आपको अवश्य ही पसन्द आया होगा और आप सबको इससे कुछ न कुछ सीख भी मिली होगी। फिर भी यह लेख आपको कैसा लगा आप हमे कमेन्ट में अवश्य बताएं। हा! इस लेख को अपने दोस्तो के साथ शेयर जरूर करें और उनको भी बोले की वो भी इस लेख को आगे शेयर करें।

चाणक्य नीति की  महत्वपूर्ण बातें । chankya niti ki mhatvapurna baten :

Tags: चाणक्य नीति, चाणक्य की राजनीति से सम्बंधित उपदेश, स्त्रियो से जुड़ी बातें जो चाणक्य नीति में कही गयी है, चाणक्य नीति के प्रमुख श्लोक, चाणक्य की बातें,

Leave a Comment