।। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचार ।। svami vivekanand ke prernadayak vichar in hindi ।।

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।। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचार ।। svami vivekanand ke prernadayak vichar in hindi ।। मित्रों हमारे वेबसाइट  www.hindiyug.com में आपका हार्दिक स्वागत है। आज आर्टिकल के क्रम में हम आपको ।। स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचार ।। svami vivekanand ke prernadayak vichar in hindi ।। 

सभी शिक्षण संस्थाओं, स्कूलों, कॉलेजों, अथवा विश्वविद्यालयो में हम स्वामी जी के जन्मदिन को युवादिवस के रूप में मनाते है। स्वामी जी ने अपने जीवन काल में युवाओं को पथ प्रदर्शन के रूप में कई उपदेश दिए उन्ही उपदेशों में से hindiyug आज आपको उनके मुख्य उपदेशों को बताएगा।

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1. “उठो, जागो और तब तक न रुको
जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए!”

2. “एक समय आता है, जब मनुष्य अनुभव करता है कि थोड़ी-सी मनुष्य की सेवा करना लाखों जप-तप-ध्यान से बढ़कर !”

3. “हमें ऐसी शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण, मन की शक्ति बढे, बुद्धि का विकास हो और मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके !”

4. “बहादुर अकेला ही महान लक्ष्य हासिल कर सकता है, जबकि कायर नहीं !”

5. “उठो, जागो, स्वयं जगकर औरों को जगाओ। अपने नर जन्म को सफल करो और तब तक ना रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए”

6. “तुम तो ईश्वर की संतान हो, अमर आनंद के भागी हो, पवित्र और पुण्य आत्मा हो। अतः तुम कैसे अपने को जबरदस्ती दुर्बल या कमजोर कहते हो? उठो, साहसी बनो। वीर्यवान बनो सभी उत्तरदायित्व अपने कंधों पर लो याद रखो कि तुम स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हो। तुम जो कुछ भी सहायता चाहो, सब तुम्हारे भीतर विद्यमान है।”

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7. “हमेशा विस्तार करना ही जीवन है और संकुचन करना । जो अपना ही स्वार्थ देखता है, वह आराम है, आलसी है, उसके लिए नर्क में भी कोई जगह नहीं।”

8. “मेरे बच्चों, मैं जो चाहता हूं, वह लोहे की नसें और फौलाद के स्नायु, जिसके भीतर ऐसा मन वास करता हो जो वज्र के समान हो। बल, पुरुषार्थ, छात्रवीर्य और ब्रह्म तेज !”

9. “आज्ञा पालन के गुण का अपने जीवन में अनुशीलन करो, परंतु अपने धर्म विश्वास को कभी मत खोने दो। गुरु के आधीन हुए बिना कभी भी शक्ति का केंद्रीयकरण नहीं हो सकता और खोई हुई शक्तियों को केंद्रित किए बिना कोई भी महान कार्य नहीं हो सकता।”

10. “नीति के तहत चलने वाले तथा साहसी बनो, अपना अंतःकरण पूर्णतया शुद्ध रखना सीखो। प्राणों को खोने के लिए कभी भी मत डरो। धार्मिक मद अथवा विचारों को लेकर कभी भी व्यर्थ में तर्क वितर्क मत करो। वह कायर लोग हैं। जो पाप का आचरण करते हैं। वीर लोग कभी भी पापों का अनुष्ठान नहीं करते यहां तक कि वह कभी मन में भी पाप का विचार नहीं लाते।”

11. “उठो, जागो और स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपनी मानव जन्म को सफल करो। तब तक न रुको, जब तक कि आपको अपना लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।

“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।”

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12. “भारत अभी जगेगा जब विशाल है देने वाले सैकड़ों स्त्री-पुरुष भोग-विलास और सुख की सभी इच्छाओं को विसर्जित करके, मन और वचन, शरीर से उन करोड़ों भारतीयों के कल्याण के लिए सच्चे मन से आगे आएंगे। जो दरिद्रता तथा मूर्खता के अपार दलदल के सागर में निरंतर नीचे डूबते जा रहे हैं।”

13. “मैं चाहता हूं कि मेरे सभी बच्चे, मैं जितना उन्नतशील बना उससे सौ गुना उन्नतशील बनो। तुम सभी लोगों में से प्रत्येक को महान और शक्तिशाली बनना होगा। मैं कहता हूं, अवश्य ही बनना होगा।”

14. “दुर्भाग्य की बात तो यह है कि अधिकांश व्यक्ति इस संसार में बिना किसी लक्ष्य के ही जीवन के इस अंधकार में रास्ते पथ पर भटकते रहते हैं। जिसका एक लक्ष्य है वह यदि 1,000 भूले करता है, तो यह निश्चित है कि जिसका कोई लक्ष्य नहीं है वह 10,000 बार भूले करेगा। इसलिए अच्छा है कि हमें एक लक्ष्य रखना आवश्यक है।”

15. “रात-दिन कहते रहो — हे गौरी नाथ! हे जगदंबे! मुझे मानवता दो मां! मेरी दुर्बलता और का कायरता दूर कर दो, मुझे केवल मनुष्य बनाओ।”

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