थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

Contents

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

मित्रों हमारे वेबसाइट www.hindiyug.com में आपका हार्दिक स्वागत है। hindiyug के आज आर्टिकल में आपको थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम व सिद्धांत के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी जो आपको अवश्य ही पसन्द आएगी।

आर्टिकल की विषय सूची :

★थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम व सिद्धांत, ★ थार्नडाइक के प्रयोग,
★ सीखने के प्रमुख सिद्धान्त,
★ प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत,
★ प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत,
★ प्रयत्न और भूल के सिद्धांत के प्रमुख गुण

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

सीखने के प्रमुख सिद्धांत :

सीखने के कई सिद्धांत है, और इन सिद्धांतों में यह कह पाना की कौन सा सिद्धांत सही है और कौन सा सिद्धांत गलत है, यह अत्यधिक कठिन है परंतु एक बात तो सत्य है कि यह सिद्धांत उन सभी तथ्यों पर प्रकाश डालते हैं की मनुष्य और बालक कुछ सफल प्रक्रियाओं को इनके द्वारा ग्रहण करते हैं।

सीखने के प्रमुख सिद्धान्त ।। sikhne ke pramukh sidhant :

प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांतथार्नडाइक
संबंध प्रतिक्रिया का सिद्धांतपावलव
क्रिया प्रसूत अधिगम का सिद्धांतस्किनर
सूझ एवं अंतर्दृष्टि का सिद्धांत (गेस्टाल्ट वादियों) का सिद्धांतकोहलर
पियाजे का सिद्धांतपियाजे
ब्रूनर का सिद्धांतब्रूनर

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

सीखने से सम्बंधित मनोवैज्ञानिको की प्रमुख परिभाषायें :

‘‘सीखना विकास की प्रक्रिया है।’

बुडवर्थ के अनुसार

‘’सीखना व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया है।’’

स्किनर के अनुसार

 ‘‘व्यवहार के कारण, व्यवहार में परिवर्तन ही सीखना है।’’

जे॰पी॰ गिलर्फड के अनुसार

‘‘पहले से निर्मित व्यवहार में अनुभवों द्वारा हुए परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।’’

कालविन के अनुसार 

उपर दी गयी परिभाषाओं से यह स्पष्ट होता है कि- सीखने के कारण व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आता है, व्यवहार में यह परिवर्तन बाह्य एवं आंतरिक दोनों ही प्रकार का हो सकता है। अतः सीखना एक प्रक्रिया है जिसमें अनुभव एवं प्रषिक्षण द्वारा व्यवहार में स्थायी या अस्थाई परिवर्तन दिखाई देता है।

उपयोगी लिंक – Ctet study material free pdf notes Click here

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

प्रतिपादक         –   थार्नडाइक
निवासी             –    U.S.A.
प्रयोग               –  भूखी बिल्ली पर 
उद्दीपक            –   मांस मछली का टुकड़ा 
उपनाम             –   प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत, प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत, अधिगम का बंध का सिद्धांत, आकृति का सिद्धांत का सिद्धांत, उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत, S-R बांड का सिद्धांत, संबंधवाद का सिद्धांत

थार्नडाइक ने सीखने के कुल 8 नियम बताए है।

मुख्य नियम ।। mukhya niyam

(1) तत्परता का नियम
(2) अभ्यास का नियम
(3) प्रभाव का नियम

गौण नियम (सहायक नियम )

(1) बहु प्रतिक्रिया का नियम
(2) आंशिक क्रिया का नियम
(3)आत्मीकरण का नियम
(4)मनोवृति का नियम
(5)संबंधित परिवर्तन का नियम

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :
 

प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत ।। prayas evam truti ka sidhant :

प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत – इस सिद्धांत के प्रतिपादक एलन थार्नडाइक हैं। सीखने के प्रमुख सिद्धांतों में से यह भी एक प्रमुख सिद्धांत है। जो इन सभी सिद्धांतों में अपना विशेष महत्व रखता है। थार्नडाइक महोदय का कहना है कि चूहे तथा बिल्ली की तरह बालक भी प्रयास एवं त्रुटि के  द्वारा ही बालक भी इसी प्रकार से चलना, बोलना, भोजन करना, उठना, बैठना आदि सब सीखते हैं।

प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत का सार – “इस प्रकार से सीखने को हम सफल प्रतिक्रियाओं के चुनाव के द्वारा सीखने की विधि भी कहते हैं”।

जब कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को करना सीखता है तो वह प्रारंभ में कई बार त्रुटियां करता है परंतु बार-बार प्रयत्न करते रहने से वह व्यक्ति उस कार्य को करना सीख जाता है सीखना जो इस प्रकार से होता है उसे ही हम प्रयास एवं त्रुटि से सीखना बोल सकते हैं।

“प्रयास और त्रुटि के अंतर्गत किसी नवीन कार्य को सीखने के लिए अनेक प्रयत्न करने पड़ते हैं जिनमें से अधिकांस गलत होते हैं”।

वुडवर्थ के अनुसार

थार्नडाइक का प्रयोग ।। Thornedike ka Prayog :

प्रयास एवं त्रुटि के सिद्धांत के लिए यह प्रयोग किया उसने सर्वप्रथम एक बिल्ली, मछली औरमांस के टुकड़े पर किया  उसने बिल्ली को  कई दिनों तक भूखा रखा और फिर इस बिल्ली को एक पिंजड़े में बंद कर दिया और वह पिंजड़ा इस प्रकार का था कि एक खटके कि दबाने पर उस पिंजरे का दरवाजा खुलता था क्योंकि बिल्ली

भूखी थी और वह भूख के कारण बाहर आना चाह रही थी। और उसने बाहर आने के लिए हजारों तहत ने किए और अंत में उसका हाथ उस खटके पर पड़ा जिससे पिंजरे का दरवाजा खुल गया और बिल्ली किसी भी प्रकार की भूल किए पिंजरे के दरवाजे को खोलना सीख गई बिल्ली का इस प्रकार से सीखना प्रयास एवं त्रुटि के आधार पर संभव हुआ।

प्रयास एवं त्रुटि सिद्धान्त के प्रमुख गुण :

प्रयत्न और भूल के सिद्धांत के प्रमुख गुण निम्न है-

● इसके द्वारा सीखने वाले बालक आशावादी बनते हैं।
● इसकी द्वारा स्थाई ज्ञान अर्जित किया जाता है।
● इसके द्वारा मंदबुद्धि बालक भी आसानी से सीखते हैं।
● यह सिद्धांत हमें उन त्रुटियों की ओर मोड़ता है जिसके द्वारा हम सीखते हैं।
● इसे सिद्धांत का सीखने की प्रक्रिया में विशेष योगदान है।
● यह सिद्धांत गणित विज्ञान व समाजशास्त्र जैसे विषयों में सीखने के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होता है।

थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike :

उपयोगी लिंक :-   Ctet UPTET study material free pdf notes Click here

मित्रों आप सब लोगो से  यही आशा करते हैं कि ‘
थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम एवं सिद्धांत ।। Principles and Principles of Learning of Thornedike के बारे में दी गयी जानकारी से आप संतुष्ट होंगे, फिर भी यह आर्टिकल आपको कैसा लगा आप हमे email के माध्यम से कमेंट्स सेक्शन के द्वारा अवश्य बताएं।

इसी प्रकार की अन्य आर्टिकल, स्टडी मैटेरियल व पीडीएफ नोट्स  हेतु आप हमारी वेबसाइट से जुड़े रहिए। अपने मित्रों को इस आर्टिकल को व्हाट्सएप, फेसबुक या मैसेंजर के द्वारा अवश्य शेयर करें।

Tags :-थार्नडाइक के सीखने के प्रमुख नियम ( Major rules of learning of Thornnike) प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत, प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत, अधिगम का बंध का सिद्धांत, आकृति का सिद्धांत का सिद्धांत, उद्दीपन अनुक्रिया का सिद्धांत, S-R बांड का सिद्धांत, संबंधवाद का सिद्धांत, प्रयत्न और भूल के सिद्धांत के प्रमुख गुण

Leave a Comment